Prime Minister Modi’s Media Strategy in the 2024 Lok Sabha Elections: Debunking Myths and Dispelling Fears – By Ahmed Sohail Siddiqui

Prime Minister Modi’s Media Strategy in the 2024 Lok Sabha Elections: Debunking Myths and Dispelling Fears – By Ahmed Sohail Siddiqui

In the heated arena of the 2024 Lok Sabha elections, Prime Minister Narendra Modi has adopted a proactive media strategy to address two pervasive narratives pushed by the opposition alliance, INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance), led by the Congress party. Through a series of interviews with teams from several TV channels and individual journalists, Modi has systematically dismantled the claims that he is a fascist communal dictator aiming to undermine the Indian Constitution and democracy, and that his government poses a threat to Muslim minorities.

### Demolishing the Dictator Myth

One of the primary accusations against Prime Minister Modi by the opposition has been that he is a dictatorial leader, whose governance style is authoritarian and detrimental to democratic values. This narrative has been a persistent theme in political discourse, with opposition leaders portraying Modi as someone who seeks to concentrate power and erode democratic institutions.

Modi’s media engagement strategy has been instrumental in countering this perception. By participating in interviews across a broad spectrum of media outlets, Modi has showcased a willingness to engage in open dialogue and answer challenging questions. This approach stands in stark contrast to the image of a leader who is unapproachable and autocratic. During these interviews, Modi has emphasized his commitment to democratic processes and institutions, underscoring that his governance is rooted in constitutional principles and the will of the people.

### Addressing Concerns of the Muslim Minority

Another significant narrative promoted by the INDIA alliance is the fear-mongering around Modi’s intentions towards Muslim minorities in India. The opposition has accused Modi and his party, the BJP, of harboring a communal agenda aimed at marginalizing Muslims and threatening their religious freedoms.

In his interviews, Modi has tackled these concerns head-on. He has reiterated his commitment to the constitutional guarantee of religious freedom and the secular fabric of the nation. By directly addressing the Muslim community, Modi has sought to reassure them that their rights and freedoms are safe under his government. He has pointed to his development agenda, which he argues benefits all Indians regardless of religion, as evidence of his inclusive approach.

### Exposing the Opposition’s Fear Politics

A key aspect of Modi’s media strategy has been to turn the tables on the opposition by exposing their reliance on fear politics. Modi has accused the INDIA alliance of perpetuating a divisive agenda that seeks to exploit communal tensions for electoral gains. He has highlighted how the opposition’s strategy of instilling fear among Muslim voters is a continuation of the 75-year-old vote bank politics that have often polarized Indian society.

Modi has used his media appearances to call for unity and focus on development issues that transcend communal lines. By framing his government’s achievements in terms of economic growth, infrastructure development, and social welfare schemes that benefit all citizens, Modi has aimed to shift the narrative from one of fear to one of hope and progress.

### Conclusion

Prime Minister Narendra Modi’s strategic media outreach during the 2024 Lok Sabha elections has been a calculated effort to dismantle two potent narratives propagated by the opposition. By engaging directly with the media and addressing contentious issues head-on, Modi has sought to prove that he is neither a dictator nor a threat to India’s religious minorities. Instead, he has positioned himself as a leader committed to democratic values and inclusive development. This approach not only counters the opposition’s claims but also reassures the Indian electorate of his government’s intentions and policies.

( The Writer is a Senior Journalist & Chief Editor of www.HudaTaha.com )

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2024 के लोकसभा चुनावों में प्रधान मंत्री मोदी की मीडिया रणनीति: मिथकों को ख़त्म करना और डर को दूर करना – अहमद सोहेल सिद्दीकी द्वारा

2024 के लोकसभा चुनावों के गर्म क्षेत्र में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन, इंडिया (भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन) द्वारा प्रचारित दो व्यापक आख्यानों को संबोधित करने के लिए एक सक्रिय मीडिया रणनीति अपनाई है। कई टीवी चैनलों की टीमों और व्यक्तिगत पत्रकारों के साथ साक्षात्कारों की एक श्रृंखला के माध्यम से, मोदी ने उन दावों को व्यवस्थित रूप से खारिज कर दिया है कि वह एक फासीवादी सांप्रदायिक तानाशाह हैं, जिसका लक्ष्य भारतीय संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करना है, और उनकी सरकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए खतरा है।

### तानाशाह मिथक को ध्वस्त करना

विपक्ष द्वारा प्रधान मंत्री मोदी के खिलाफ प्राथमिक आरोपों में से एक यह है कि वह एक तानाशाही नेता हैं, जिनकी शासन शैली सत्तावादी और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए हानिकारक है। यह कथा राजनीतिक चर्चा में लगातार विषय रही है, विपक्षी नेता मोदी को ऐसे व्यक्ति के रूप में चित्रित करते हैं जो सत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है और लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहता है।

इस धारणा का मुकाबला करने में मोदी की मीडिया सहभागिता रणनीति महत्वपूर्ण रही है। मीडिया आउटलेट्स के व्यापक स्पेक्ट्रम में साक्षात्कारों में भाग लेकर, मोदी ने खुली बातचीत में शामिल होने और चुनौतीपूर्ण सवालों के जवाब देने की इच्छा प्रदर्शित की है। यह दृष्टिकोण एक ऐसे नेता की छवि के बिल्कुल विपरीत है जो अप्राप्य और निरंकुश है। इन साक्षात्कारों के दौरान, मोदी ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दिया है, यह रेखांकित करते हुए कि उनका शासन संवैधानिक सिद्धांतों और लोगों की इच्छा पर आधारित है।

### मुस्लिम अल्पसंख्यकों की चिंताओं को संबोधित करना

इंडिया गठबंधन द्वारा प्रचारित एक और महत्वपूर्ण कथा भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रति मोदी के इरादों के बारे में भय फैलाना है। विपक्ष ने मोदी और उनकी पार्टी, भाजपा पर मुसलमानों को हाशिये पर धकेलने और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को खतरे में डालने के उद्देश्य से सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।

अपने साक्षात्कारों में, मोदी ने इन चिंताओं से सीधे तौर पर निपटा है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुस्लिम समुदाय को सीधे संबोधित करके, मोदी ने उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश की है कि उनकी सरकार के तहत उनके अधिकार और स्वतंत्रता सुरक्षित हैं। उन्होंने अपने समावेशी दृष्टिकोण के प्रमाण के रूप में अपने विकास एजेंडे की ओर इशारा किया है, जिसके बारे में उनका तर्क है कि इससे धर्म की परवाह किए बिना सभी भारतीयों को लाभ होता है।

### विपक्ष की डर की राजनीति को उजागर करना

मोदी की मीडिया रणनीति का एक प्रमुख पहलू भय की राजनीति पर उनकी निर्भरता को उजागर करके विपक्ष पर बाजी पलटना है। मोदी ने भारतीय गठबंधन पर विभाजनकारी एजेंडे को कायम रखने का आरोप लगाया है जो चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक तनाव का फायदा उठाना चाहता है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे मुस्लिम मतदाताओं के बीच डर पैदा करने की विपक्ष की रणनीति 75 साल पुरानी वोट बैंक की राजनीति की निरंतरता है जिसने अक्सर भारतीय समाज का ध्रुवीकरण किया है।

मोदी ने अपनी मीडिया उपस्थिति का उपयोग एकता का आह्वान करने और सांप्रदायिक रेखाओं से परे विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए किया है। आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विकास और सभी नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली सामाजिक कल्याण योजनाओं के संदर्भ में अपनी सरकार की उपलब्धियों को परिभाषित करके, मोदी ने कहानी को भय से आशा और प्रगति की ओर स्थानांतरित करने का लक्ष्य रखा है।

### निष्कर्ष

2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीतिक मीडिया पहुंच विपक्ष द्वारा प्रचारित दो शक्तिशाली आख्यानों को खत्म करने का एक सुविचारित प्रयास है। मीडिया से सीधे जुड़कर और विवादास्पद मुद्दों को सीधे संबोधित करके, मोदी ने यह साबित करने की कोशिश की है कि वह न तो तानाशाह हैं और न ही भारत के धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरा हैं। इसके बजाय, उन्होंने खुद को लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध नेता के रूप में स्थापित किया है। यह दृष्टिकोण न केवल विपक्ष के दावों का खंडन करता है बल्कि भारतीय मतदाताओं को उनकी सरकार के इरादों और नीतियों के बारे में आश्वस्त भी करता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं www.HudaTaha.com के मुख्य संपादक हैं)

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2024 کے لوک سبھا انتخابات میں وزیر اعظم مودی کی میڈیا حکمت عملی: خرافات کو ختم کرنا اور خوف کو دور کرنا – احمد سہیل صدیقی

2024 کے لوک سبھا انتخابات کے گرما گرم میدان میں، وزیر اعظم نریندر مودی نے کانگریس پارٹی کی قیادت میں اپوزیشن اتحاد، انڈیا (انڈین نیشنل ڈیولپمنٹل انکلوسیو الائنس) کی طرف سے دھکیلنے والے دو وسیع بیانیہ سے نمٹنے کے لیے ایک فعال میڈیا حکمت عملی اپنائی ہے۔ متعدد ٹی وی چینلز اور انفرادی صحافیوں کی ٹیموں کے ساتھ انٹرویوز کے سلسلے کے ذریعے، مودی نے منظم طریقے سے ان دعوؤں کو ختم کر دیا ہے کہ وہ ایک فاشسٹ فرقہ پرست آمر ہے جس کا مقصد ہندوستانی آئین اور جمہوریت کو نقصان پہنچانا ہے، اور یہ کہ ان کی حکومت مسلم اقلیتوں کے لیے خطرہ ہے۔

### ڈکٹیٹر کے افسانے کو منہدم کرنا

اپوزیشن کی طرف سے وزیر اعظم مودی کے خلاف بنیادی الزامات میں سے ایک یہ ہے کہ وہ ایک آمرانہ رہنما ہیں، جن کا طرز حکمرانی آمرانہ اور جمہوری اقدار کے لیے نقصان دہ ہے۔ یہ بیانیہ سیاسی گفتگو میں ایک مستقل موضوع رہا ہے، جس میں اپوزیشن لیڈر مودی کو ایسے شخص کے طور پر پیش کرتے ہیں جو طاقت کو مرتکز کرنے اور جمہوری اداروں کو تباہ کرنے کی کوشش کرتا ہے۔

مودی کی میڈیا مصروفیت کی حکمت عملی اس تاثر کا مقابلہ کرنے میں اہم رہی ہے۔ میڈیا آؤٹ لیٹس کے وسیع میدان میں انٹرویوز میں حصہ لے کر، مودی نے کھلی بات چیت میں مشغول ہونے اور چیلنجنگ سوالات کے جوابات دینے کی خواہش ظاہر کی ہے۔ یہ نقطہ نظر ایک ایسے رہنما کی تصویر کے بالکل برعکس ہے جو ناقابل رسائی اور خود مختار ہے۔ ان انٹرویوز کے دوران، مودی نے جمہوری عمل اور اداروں کے تئیں اپنی وابستگی پر زور دیا ہے، اس بات پر زور دیا ہے کہ ان کی حکمرانی کی جڑیں آئینی اصولوں اور عوام کی مرضی سے ہیں۔

### مسلم اقلیت کے تحفظات کا ازالہ

انڈیا اتحاد کی طرف سے فروغ دیا گیا ایک اور اہم بیانیہ ہندوستان میں مسلم اقلیتوں کے تئیں مودی کے ارادوں کے گرد خوف پھیلانا ہے۔ اپوزیشن نے مودی اور ان کی پارٹی بی جے پی پر فرقہ وارانہ ایجنڈے کو پناہ دینے کا الزام لگایا ہے جس کا مقصد مسلمانوں کو پسماندہ کرنا اور ان کی مذہبی آزادیوں کو خطرہ ہے۔

اپنے انٹرویوز میں مودی نے ان خدشات کو سر پر نمٹا دیا ہے۔ انہوں نے مذہبی آزادی کی آئینی ضمانت اور قوم کے سیکولر تانے بانے کے لیے اپنے عزم کا اعادہ کیا ہے۔ مسلم کمیونٹی سے براہ راست خطاب کرتے ہوئے مودی نے انہیں یقین دلانے کی کوشش کی ہے کہ ان کی حکومت میں ان کے حقوق اور آزادی محفوظ ہیں۔ انہوں نے اپنے ترقیاتی ایجنڈے کی طرف اشارہ کیا ہے، جس کے بارے میں وہ دلیل دیتے ہیں کہ مذہب سے قطع نظر تمام ہندوستانیوں کو فائدہ ہوتا ہے، جو کہ ان کے جامع نقطہ نظر کے ثبوت کے طور پر ہے۔

### اپوزیشن کی خوف کی سیاست کو بے نقاب کرنا

مودی کی میڈیا حکمت عملی کا ایک اہم پہلو یہ رہا ہے کہ وہ خوف کی سیاست پر انحصار کرتے ہوئے حزب اختلاف کی میزوں کو الٹ دیں۔ مودی نے ہندوستانی اتحاد پر ایک تقسیم کرنے والے ایجنڈے کو برقرار رکھنے کا الزام لگایا ہے جو انتخابی فوائد کے لئے فرقہ وارانہ کشیدگی کا فائدہ اٹھانا چاہتا ہے۔ انہوں نے اس بات پر روشنی ڈالی ہے کہ کس طرح اپوزیشن کی مسلم ووٹروں میں خوف پیدا کرنے کی حکمت عملی 75 سالہ ووٹ بینک کی سیاست کا تسلسل ہے جس نے اکثر ہندوستانی سماج کو پولرائز کیا ہے۔

مودی نے اپنی میڈیا پیشیوں کو اتحاد کی دعوت دینے اور فرقہ وارانہ خطوط سے بالاتر ترقیاتی مسائل پر توجہ مرکوز کرنے کے لیے استعمال کیا ہے۔ اقتصادی ترقی، بنیادی ڈھانچے کی ترقی، اور سماجی بہبود کی اسکیموں کے حوالے سے اپنی حکومت کی کامیابیوں کو مرتب کرتے ہوئے، جو تمام شہریوں کو فائدہ پہنچاتی ہیں، مودی نے بیانیہ کو خوف سے ایک امید اور ترقی کی طرف منتقل کرنے کا مقصد بنایا ہے۔

###نتیجہ

2024 کے لوک سبھا انتخابات کے دوران وزیر اعظم نریندر مودی کی اسٹریٹجک میڈیا کی رسائی اپوزیشن کی طرف سے پروپیگنڈہ کیے جانے والے دو طاقتور بیانیے کو ختم کرنے کی ایک حسابی کوشش رہی ہے۔ میڈیا کے ساتھ براہ راست مشغول ہوکر اور متنازعہ مسائل کو سر پر اٹھاتے ہوئے، مودی نے یہ ثابت کرنے کی کوشش کی ہے کہ وہ نہ تو ایک آمر ہیں اور نہ ہی ہندوستان کی مذہبی اقلیتوں کے لیے خطرہ ہیں۔ اس کے بجائے، اس نے خود کو جمہوری اقدار اور جامع ترقی کے لیے پرعزم رہنما کے طور پر پیش کیا ہے۔ یہ نقطہ نظر نہ صرف اپوزیشن کے دعوؤں کا مقابلہ کرتا ہے بلکہ ہندوستانی ووٹروں کو ان کی حکومت کے ارادوں اور پالیسیوں کے بارے میں بھی یقین دلاتا ہے۔

(مضمون نگار سینئر صحافی اور www.HudaTaha.com کے چیف ایڈیٹر ہیں)

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